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KISAN, Hindi, By Honore de Balzac, Translated Satyam, Fiction, Paperback, Published By Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd


₨ 475.00

विश्व के सार्वकालिक महानतम उपन्यासकारों में से एक बाल्ज़ाक (1799-1850) की अद्वितीयता और प्रासंगिकता आज भी अक्षुण्ण है।
अपनी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कृतियों में से एक किसान में बाल्ज़ाक क्रान्ति- पश्चात् फ्रांस के ग्रामीण जीवन में बढ़ती पूँजी की पैठ, सामन्ती भूमि-सम्बन्धों के पूँजीवादी रूपान्तरण, पुराने भूस्वामियों का स्थान ले रहे नये व्यापारी-भूस्वामी-सूदखोर- ठेकेदार गठजोड़ के षड्यंत्रों- तिकड़मों, जमीन की भूख तथा पूँजी की ताकत के हाथों छोटे मालिक किसानों की तबाही, सदियों के शोषण-दमन से गरीब किसानों में उपजे अमानवीकरण और जीने के लिए उनके अनवरत संघर्ष की वैसी ही सजीवता से तस्वीर खींचते हैं जिसके बारे में मक्सिम गोर्की ने कहा है : “ऐसा लगता है मानो बाल्ज़ाक की रचनाएँ तैलरंगों में लिखी गई हैं! “

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